किसी को उम्र भर सर पर बिठाना
बड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
कभी तन्हाई में सुनना सुनाना
बड़ी मासूम सी उनकी अदा है
उठा कर के गिराना फिर उठाना
जुनूने इश्क में होता है अक्सर
लगी हो चोट फिर भी मुस्कुराना
जला कर ख़ाक कर सकते हैं घर को
चरागों से है रोशन यूँ ज़माना
कहाँ आसान होता है किसी को
किसी भी गैर का हंसना हँसाना
नहीं आती है सबको रास शोहरत
बुलंदी पर नही रहता ठिकाना
वाह...........
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया सर.
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना
लाजवाब शेर....
सादर.
वाह...........
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया सर.
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना
लाजवाब शेर....
सादर.
वाह...........
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया सर.
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना
लाजवाब शेर....
सादर.
किसी को उम्र भर सर पर बिठाना
जवाब देंहटाएंबड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना
और जो ऐसा कर जाते हैं वही गोपियों की तरह अमर हो जाते हैं... बहुत सुंदर गजल !
वाह...........
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया सर.
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना
लाजवाब शेर....
सादर.
वाह...........
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया सर.
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना
लाजवाब शेर....
सादर.
अच्छी प्रस्तुति के लिये बहुत बहुत बधाई....
जवाब देंहटाएंबहुत प्यारी गज़ल......
जवाब देंहटाएंमगर मेरी दाद आप तक पहुँच नहीं रही....
:-(
शायद स्पाम में मिले मेरी टिप्पणियाँ.
सादर.
यही है खासियत ग़ज़लों की इनकी,
जवाब देंहटाएंनहीं आसान है इनको भुलाना!
बेहद गहरे अर्थों को समेटती खूबसूरत और संवेदनशील रचना....आपके लेखन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है नासवा जी आभार आपका !!
जवाब देंहटाएंअच्छा लिखा है आपने.. बस एक जगह थोड़ा खटक रहा है - बड़ी मासूम सी उनकी अदा है
जवाब देंहटाएंउठा कर के गिराना फिर उठाना.. यहां स्पष्टता नहीं है हालांकि समझ आ रहा है कि पलकों के गिराने उठाने की बात हो रही है..
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
जवाब देंहटाएंकभी तन्हाई में सुनना सुनाना
वाह!
किसी को उम्र भर सर पर बिठाना
जवाब देंहटाएंबड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना
sach mein badi mushkil hai.....
बड़ी मासूम सी उनकी अदा है
जवाब देंहटाएंपलकें उठाना उठा कर के गिराना
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
कभी तन्हाई में सुनना सुनाना
बहुत खूबसूरत अंदाज़...
सुंदर गजल हमेशा कि तरह ही हर एक शेर लाजवाब अपने आपमें एक जीवन दर्शन समेटे
जवाब देंहटाएंबड़ी मासूम सी उनकी अदा है
जवाब देंहटाएंउठा कर के गिराना फिर उठाना
सच में यह अदा जीवन में बहुत बार सामने आती है ....!
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
जवाब देंहटाएंउसी पत्थर को सीने से लगाना.... बाप रे बाप ... मुश्किल नहीं , जीते जी मर जाना है
आप तो ऐसे ना थे ! ये शिकवा किस लिए :)
जवाब देंहटाएंखूबसूरत ग़ज़ल ।
जवाब देंहटाएंकहाँ आसान होता है किसी को
किसी भी गैर का हंसना हँसाना
ये कैसा रहेगा --
कहाँ आसान होता है किसी का
किसी भी गैर को हंसना हँसाना
लाजवाब ||
जवाब देंहटाएंबहुत खूब ....
जवाब देंहटाएंbahut umda gazal...puri gazal safar-e-zindgani ka khulasa karti hui.
जवाब देंहटाएंअति सुन्दर अभिव्यक्ति।
जवाब देंहटाएंसार्थक गज़ल। शब्द-शब्द
में चिन्तन और मनन।
धन्यवाद।
आनन्द विश्वास।
जला कर ख़ाक कर सकते हैं घर को
जवाब देंहटाएंचरागों से है रोशन यूँ ज़माना
haan vakt se ru -baa ru
जुनूने इश्क में होता है अक्सर
जवाब देंहटाएंलगी हो चोट फिर भी मुस्कुराना ..waah sir
जला कर ख़ाक कर सकते हैं घर को
जवाब देंहटाएंचरागों से है रोशन यूँ ज़माना,....
वाह!!!!सुन्दर गजल ,बेहतरीन लाजबाब प्रस्तुति,.....
RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....
RECENT POST...फुहार....: रूप तुम्हारा...
shandaar parstuti
जवाब देंहटाएंनहीं आती है सबको रास शोहरत
जवाब देंहटाएंबुलंदी पर नही रहता ठिकाना
एकदम वजा फ़रमाया जी . जो ऊपर चढ़ा है नीचे भी आएगा . सुँदर ग़ज़ल
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
जवाब देंहटाएंकभी तन्हाई में सुनना सुनाना
वाह...बेहतरीन!!
किसी को उम्र भर सर पर बिठाना
जवाब देंहटाएंबड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना
आपका लिखा पढ़ने की बात ही कुछ और है सर!
सादर
ACHCHHEE GAZAL KE LIYE MEREE
जवाब देंहटाएंBADHAAEE SWEEKAAR KAREN .
आपकी यह गज़ल बार-बार पढने लायक है । खूबसूरत
जवाब देंहटाएंbahut badhiya....
जवाब देंहटाएंकिसी को उम्र भर सर पर बिठाना
जवाब देंहटाएंबड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना
Bahut Badhiya....
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
जवाब देंहटाएंउसी पत्थर को सीने से लगाना
यही सबसे मुश्किल ...
जुनूने इश्क में होता है अक्सर
जवाब देंहटाएंलगी हो चोट फिर भी मुस्कुराना
बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हर शेर लाजबाब , मुबारक हो
बहुत खूब, सच में बड़ा मुश्किल है यह।
जवाब देंहटाएंमेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
जवाब देंहटाएंकभी तन्हाई में सुनना सुनाना
जुनूने इश्क में होता है अक्सर
लगी हो चोट फिर भी मुस्कुराना
वाह ,....बहुत खूबसूरत गजल
इसे पढ़कर बहुत आनन्द आया.हर एक शेर का अलग आनन्द है.
जवाब देंहटाएंनहीं आती है सबको रास शोहरत
जवाब देंहटाएंबुलंदी पर नही रहता ठिकाना
sahi hai bahut sundar gajal.....badhai,
नहीं आती है सबको रास शोहरत
जवाब देंहटाएंबुलंदी पर नही रहता ठिकाना .....waah bahut khoob
हमेशा की तरह बढिया।
जवाब देंहटाएंAti Sunder maargdarshi kavita :)
जवाब देंहटाएंबड़ी मासूम सी उनकी अदा है
जवाब देंहटाएंउठा कर के गिराना फिर उठाना
नहीं आती है सबको रास शोहरत
बुलंदी पर नही रहता ठिकाना
Waah !
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
जवाब देंहटाएंकभी तन्हाई में सुनना सुनाना.
वाह ! दिगम्बर जी, क्या अंदाज है,
टूटा कुछ- ना आई आवाज है
कुछ हमारी भी......
कह गया जोकर सारा जमाना
आधी हकीकत आधा फसाना.
इसी अंदाज पे मिटा जमाना
आधी हकीकत ही जतलाना.
समझे अजी ! समझने वाले
क्या है हकीकत,क्या है फसाना.
मन मंदिर की प्रतिमा बताकर
पत्थर को सीने से लगाना
चाहे वह ठोकर भी मारे
लेकिन फिर भी सर पे बिठना
मन को छूती, अद्भुत पंक्ति
"कभी तनहाई में सुनना-सुनाना"
किसी को उम्र भर सर पर बिठाना
जवाब देंहटाएंबड़ी मुश्किल है यूँ रिश्ता निभाना
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
उसी पत्थर को सीने से लगाना
ye sher bahut hi acche lage ..bandhaaii ho
सच है जी!
जवाब देंहटाएंबड़ी मासूम सी उनकी अदा है
जवाब देंहटाएंउठा कर के गिराना फिर उठाना
.....अपने ही अक्सर ऐसा करते हैं ....सुन्दर भाव !
अग्नि में जो कुछ भी डालो
अपने आपमें एक जीवन दर्शन समेटे बहुत खुबसूरत ग़ज़ल बहुत खूब, बार-बार पढने लायक.लाजवाब!!!
जवाब देंहटाएंबड़ी मासूम सी उनकी अदा है
जवाब देंहटाएंउठा कर के गिराना फिर उठाना.....बहुत खूबसूरत गजल...
वाह...बहुत बढ़िया
जवाब देंहटाएंबहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल....हर शेर उम्दा और बेहतरीन....वाह ।
जवाब देंहटाएंwaah kya khoob likha hai Digambar ji
जवाब देंहटाएंजुनूने इश्क में होता है अक्सर
लगी हो चोट फिर भी मुस्कुराना
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
जवाब देंहटाएंउसी पत्थर को सीने से लगाना
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
कभी तन्हाई में सुनना सुनाना
नि:शब्द कर दिया आपने इन पंक्तियों में ...बहुत ही लाजवाब लिखा है ..
कहाँ आसान होता है किसी को
जवाब देंहटाएंकिसी भी गैर का हंसना हँसाना
नहीं आती है सबको रास शोहरत
बुलंदी पर नही रहता ठिकाना
..bahut sundar gahan chintan karati sundar rachna...aabhar!
बहुत सुन्दर .....
जवाब देंहटाएंआपकी गज़लें लाजवाब कर देतीं हैं...उम्दा शेर...बेहतरीन ग़ज़ल...
जवाब देंहटाएंहज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
जवाब देंहटाएंउसी पत्थर को सीने से लगाना
बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल..
बहुत प्यारी गज़ल
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर गजल !
जवाब देंहटाएंसचमुच रिश्तों को निभाना मुश्किल काम है।
जवाब देंहटाएंशानदार गजल ...
जवाब देंहटाएंदाद देने के लिए किसी एक शे'र को चुनना कठिन लग रहा है...
जवाब देंहटाएंपूरी ग़ज़ल शानदार!
उम्दा गजल
जवाब देंहटाएंसभी शेर बहुत अच्छे, ये खास पसंद आया...
जवाब देंहटाएंकहाँ आसान होता है किसी को
किसी भी गैर का हंसना हँसाना
नहीं आती है सबको रास शोहरत
बुलंदी पर नही रहता ठिकाना
दाद स्वीकारें.
हर शेर बहुत ही संजीदगी से लिखा हुआ हैं ...बहुत बढिया
जवाब देंहटाएंनहीं आती है सबको रास शोहरत
जवाब देंहटाएंबुलंदी पर नही रहता ठिकाना
वाह! बोलते हुए शेर....बहुत खूब ग़ज़ल....मुबारक हो..
हज़ारों ठोकरें मारीं हो जिसने
जवाब देंहटाएंउसी पत्थर को सीने से लगाना
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
कभी तन्हाई में सुनना सुनाना
.....waah bahut sunder .........aapki gajal waah bahut acchi hoti hai
hardik badhai
bahut hi sundar lajbab rachana ...badhai Digambar ji
जवाब देंहटाएंसही कहा आपने....रिश्ते बनाने से ज्यादा तो उन्हें निभाना कठिन होता है!...बहुत सुन्दर रचना!
जवाब देंहटाएंलाजवाब रचना!
जवाब देंहटाएंकमाल की रचना ...बधाई नासवा जी
जवाब देंहटाएंनहीं आती है सबको रास शोहरत
जवाब देंहटाएंबुलंदी पर नही रहता ठिकाना
भाई साहब आपकी टिप्पणियाँ स्पैम जी ले उड़तें हैं ,छुडानी पड़तीं हैं .
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
जवाब देंहटाएंकभी तन्हाई में सुनना सुनाना
बहुत खूब ....
मेरे गीतों में खुद को पाओगे तुम
जवाब देंहटाएंकभी तन्हाई में सुनना सुनाना
नई जमीन पर लिखी गई सुंदर ग़ज़ल
नहीं आती है सबको रास शोहरत
जवाब देंहटाएंबुलंदी पर नही रहता ठिकाना
बहुत सुंदर गजल ...बेहतरीन रचना के लिए बधाई,....
मेरे पोस्ट आइये स्वागत है,.....
.
MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....
बेहतरीन बानगी....
जवाब देंहटाएंaapki rachnayen bahut sundar hain..badhai!
जवाब देंहटाएंनहीं आती है सबको रास शोहरत
जवाब देंहटाएंबुलंदी पर नही रहता ठिकाना ....sacchi bat.....
मगर हुजुर आपके शेरो सुखन की ये बलंदी बनी रहे...लाजवाब!
जवाब देंहटाएंA very well-written post. I read and liked the post and have also bookmarked you. All the best for future endeavors.
जवाब देंहटाएंIt is a pleasure going through your post. I have bookmarked you to check out new stuff from your side.
जवाब देंहटाएंThe post is handsomely written. I have bookmarked you for keeping abreast with your new posts.
जवाब देंहटाएंThanks for writing in such an encouraging post. I had a glimpse of it and couldn’t stop reading till I finished. I have already bookmarked you.
जवाब देंहटाएंThanks for writing in such an encouraging post. I had a glimpse of it and couldn’t stop reading till I finished. I have already bookmarked you.
जवाब देंहटाएंThe post is very informative. It is a pleasure reading it. I have also bookmarked you for checking out new posts.
जवाब देंहटाएं